चामुण्डा शक्ति
चामुंडा वह शक्ति है जो भय को जन्म लेने से पहले ही भस्म कर देती है। यह वह उग्र ऊर्जा है जो मानव के भीतर छिपे अंधकार, कमजोरी और पराधीनता को निगलकर उसे निर्भय और तेजस्वी बनाती है। श्मशान, रात, तंत्र, मुंडमाला, व्याघ्रचर्म और गधे पर सवार उनका रूप केवल भयंकर नहीं, बल्कि जीवन के उस सत्य का स्मरण है जिसमें मृत्यु और भय पर विजय के बिना कोई साधक दिव्यता को छू नहीं सकता। चामुंडा का नाम ही चंड और मुंड जैसे अहंकारी असुरों के विनाश से बना, इसलिए इनके ध्यान से मनुष्य के भीतर का असुर रूप टूटता है। यह देवी बाहरी शत्रु नहीं, बल्कि भीतर की क्रूर प्रवृत्तियों को मार कर मनुष्य को सच्चे अर्थों में विजयी बनाती है। चामुंडा साधना जीवन को साधारण नहीं, अलौकिक दिशा में ले जाने वाली साधना है। कहा गया है कि जो साधक इनके मंत्र में रमता है, उसके भीतर की जड़ता, भय, नकारात्मक विचार, दुर्भाग्य और मानसिक दुर्बलता नष्ट होती है। यह साधना साधक को अदृश्य शक्तियों से संरक्षण, मनोबल, तेज, आकर्षण, तांत्रिक प्रभाव, शत्रुनाश और आत्मिक स्वतंत्रता देती है। इनकी कृपा से भूत-बाधा, दुष्ट शक्तियाँ, मानसिक विकार, रोग, काली ऊर्जा औ...
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